श्री गणेश जी की बात, गणेशोत्सव के साथ
ईश्वर को प्रणाम व सभी साथियों को नमस्कार 🙏
दिनांक 22.08.2020 को प्रारंभ हुए गणेश गणेश उत्सव की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं💐💐
इस वर्ष कोरोना बीमारी की वजह से गणेश महोत्सव में काफी परिवर्तन किया गया है, जिससे कि उत्सव के मनाने के तरीके भी परिवर्तित हुए हैं। श्री गणेश जी से विनय है कि सभी पर कृपा करते हुए सभी को सद्बुद्धि व ज्ञान प्रदान करें।
आज की पोस्ट में शिवजी के परिवार की तरह रहने की बात के माध्यम से हमें भी परिवार में कुछ इसी तरह रहना चाहिए, यह बात रखने की कोशिश हैं। श्री गणेश उत्सव अवधि में इस परिवार की विशेष बातें जिन्हें हम सभी को अपने जीवन में उपयोग करना चाहिए, उन बातों को आपके समक्ष रखने का प्रयास हैं। आप सभी पहले से ही इस जानकारी से अवगत होंगे।
सनातन धर्म में भगवान ने कभी अपनी पूजा करने को शायद ही कहा हो, हां यह जरूर कहा है कि उनका नाम भले ना लो मगर उनके अनुसार काम अवश्य करें। जिससे कि परिवार व समाज में प्रेम व विश्वास के साथ जीवन सरल हो। आज के इस दौर में राम नाम लेने से कहीं आवश्यक है कि हम राम जैसा काम समाज के हित में कर सकें। कुछ शिव जी के परिवार से सीख लेते हुए हम भी अपने परिवार, कार्यस्थल व समाज में प्रेम पूर्वक रह सकें। शिव जी के परिवार के माध्यम से विचार आपके समक्ष प्रस्तुत करने की कोशिश हैं।
बात कुछ इस प्रकार हैं कि भगवान शिव के परिवार में यह देखने को मिलता है कि उनके परिवार में जितने वाहन हैं जैसे भगवान शंकर गले में सर्प धारण करते हैं। उनके पुत्र गणेश का वाहन चूहा है। सर्प और चूहा एक दूसरे के शत्रु होते हुए भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। भगवान कार्तिकेय का वाहन मोर है, जो कि सर्प का भक्षण करता है, लेकिन दोनों आपस में प्रेम से रहते हैं। भगवान शिव का वाहन बैल है, जबकि माता पार्वती का वाहन शेर है। दोनों एक दूसरे के दुश्मन होते हुए आपस में मिलजुलकर रहते हैं। भगवान शिव के परिवार में रहन-सहन और खानपान में काफी विषमता होने के बावजूद भी सभी प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना से रहते हैं। और इन सभी की परस्पर आपस में शत्रुता है लेकिन फिर भी इनके बीच में कभी कोई लड़ाई छिड़ी हो ऐसा नहीं हुआ क्योंकि देवताओं के जो प्रतीकात्मक पशु वाहन हैं वे शत्रुता के बीच मित्रता का भाव जाग्रत करते हैं और अपने स्वभाव अपनी प्रवृति को छोड़े बिना सभी मिलजुलकर रहते हैं।
सामाजिक तौर पर देखें तो परिवारों में भी यह जरूरी है अलग-अलग विचारों, अभिरूचियों, स्वाभावों के बावजूद हम लोग हिलमिल कर रहें अपनी सोच दूसरों पर न थोपी जाय और सबसे खास बात यहकि मुखिया और अन्य बड़े सदस्यों के गले में गरल थामें रखने का धीरज और सबको साथ लेकर चलने की आदत हो तभी परिवार चल सकते हैं| यह बात हमारे परिवार तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए वरन हमारे देश में विभिन्न धर्मो, जाति और विविधताओं के बीच एकता व संतुलन शिव परिवार की तरह जरूरी है|
सर्वमान्य और सर्वोचित निर्णय ठण्डे दिमाग से ही लिये जा सकते हैं। महाशिव के मस्तक पर चन्द्रमा और गंगा का होना इस बात का संकेत है कि मस्तिष्क को सदा शीतल रखो। चन्द्रमा और गंगाजल दोनों में असीम शीतलता है। मानव मात्र को भगवान शिव यह संदेश देते हैंकि भले ही हमारा स्वाभाव और प्रकृति भिन्न हो पर हमें परस्पर मिल कर रहना चाहिए।
इसके साथ ही आप सभी के सहयोग व प्रभु की कृपा से जीवन एक अवसर समिति, जैसीनगर का पंजीयन पूर्ण हो गया है। समिति की विस्तृत जानकारी आगामी पोस्ट में समाहित करने का प्रयास रहेगा। आप सभी से विनय है कि इस समिति के उद्देश्य हेतु अपना सहयोग व आशीर्वाद सदैव समिति के परिवार पर बनाए रखें।
आप सभी को कोटि-कोटि धन्यवाद व ईश्वर को प्रणाम🙏
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