कोरोना चुनौती के साथ, अवसर (अंतिम भाग)




  " कोरोना चुनौती के साथ, अवसर"

डॉक्टर  शरद तिवारी भाई साहब को (17/05/2020)जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻

           वैश्विक व्याधि, कोरोना चुनौती के साथ अवसर भाग 1 व भाग 2 की चर्चा को आगे बढ़ाते हैं।  इस समय में यह तो स्पष्ट हो गया है कि प्रकृति के साथ अगर हमारा व्यवहार, प्रकृति के कार्य में व्यवधान उत्पन्न करेगा तो निश्चित ही प्रकृति अपना संतुलन बनाने में सक्षम है। प्रकृति ने पिछले कुछ दिनों में पूरे विश्व को इस तरह भयभीत करते हुए चेतावनी दी है। इसके साथ ही जो भी पर्यावरण की बड़ी-बड़ी वैश्विक स्तर पर समस्याएं थी, उन्हें प्रकृति ने स्वतः ही अपने स्तर पर ठीक कर दिया। 
           Lockdown का जनजीवन पर प्रभाव व पर्यावरण पर प्रभाव की बात पिछली पोस्ट में विस्तार से की गई है। आज इस पोस्ट के माध्यम से मैं जो बात रखने की कोशिश कर रहा हूं, वह यही है कि इस विषम परिस्थिति में जीवन घर की चार दीवारों में कैद होकर रह गया है। तो इन हालातों में हम सिर्फ दूसरों को कोसने या दूसरों की कमियों को निकालते हुए, इस समय को व्यतीत न कर दें। हम अपने अंदर घर में रहते हुए अपने लिए इस चुनौती को अवसर के रूप में परिवर्तित कर पाए, ऐसा कुछ प्रयास हमें करना चाहिए।

    Stay home stay safe:-  Lockdown जैसे ही लागू किया गया सभी देशवासियों से सरकार की एकमात्र यही अपेक्षा की थी कि इस आपातकाल में सेवा देने वाले विभागों को विपत्ति के समय में कार्य करने में सहयोग दें। समस्त आपातकालीन विभाग कार्य करें, उन समस्त विभागों को छोड़कर, शेष सभी विभाग व जनता अपने घरों पर रहकर अपनी सुरक्षा करके ही अपने परिवार व अन्य समाज के सदस्यों को सुरक्षा व सहायता प्रदान करें। घर पर रहकर हम शासन को सहयोग देते हुए, अपनी क्षमताओं को बढ़ाने हेतु कार्य कर सकते हैं, हमारी रुचि के अनुरूप कार्य कर सकते हैं, परिवार के सदस्यों को समय दे सकते हैं, भविष्य को लेकर कुछ योजना बना सकते हैं आदि इस प्रकार के कार्य हैं जिन्हें हम घर पर रहकर हम शांतिमय वातावरण में भविष्य के लिए तैयार कर सकते हैं। इस प्रकार यह चुनौती हर व्यक्ति के लिए अवसर भी हैं। साथ ही सरकार व व्यक्तिगत सभी देशवासियों के लिए संदेश है कि जब भी हम जीवन में कठिन समय को महसूस करें और जीवन एकदम रुक जाए तो भी जीवन खत्म नहीं होगा।

              इसके साथ ही अगर हम अपने भारत देश की बात करें तो भविष्य में प्रत्येक वर्ष पर्यावरण की व्यवस्था को सुधारने हेतु संपूर्ण भारत में lockdown व्यवस्था का प्रयोग बड़े शहर या छोटे शहर जहां भी आवश्यक हो,  उस शहर को 15 दिवस या उससे कम या 15 दिवस से अधिक दिवस हेतु पूर्ण lockdown करके पर्यावरण में बड़ी आसानी से संतुलन बनाया जा सकता है।

              साथ ही पलायन की जो स्थिति 03.05.2020 के बाद पूरे भारत में बनी है।  उसमें सभी का अपना अपना नजरिया है कोई उसे पूर्णता गलत बता रहा है कि शासन को इस तरह से दैनिक मजदूरों के लिए आवागमन नहीं खोलना था। इसके साथ ही देश के कुछ व्यक्तियों के तर्क हैं कि शासन द्वारा बनाई गई व्यवस्था फेल हो गई है। मैं इस बात पर ज्यादा चर्चा न करते हुए सभी से निवेदन करता हूं कि हम व्यक्तिगत जवाबदारी ले और घर पर सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रखें। क्योंकि हम अपने घर पर नही रहते और मोहल्ले, चौराहों पर जहां पुलिस विभाग के कर्मचारी नहीं पहुंच सकते हैं। वहां से हम पूरे शहर व देश की व्यवस्था पर अपने विचार साझा करते हैं व सुझाव व्यक्त करते हैं। साथी शासन के द्वारा किए गए कार्यों मैं हम शासन को निर्देशित भी करते हैं कि शासन को इस तरह कार्य करना चाहिए।

             इस कठिन परिस्थिति में सबसे आसान और कारगर तरीका यही है कि आप, मैं या हम अधिक से अधिक जब तक कोई विशेष कार्य ना हो तो हम अपने घर से बाहर ना जाए। इससे सरल तरीका इस वैश्विक बीमारी से बचने का शायद और कोई नहीं है।

             इसके साथ ही कुछ पंक्तियां नेट के माध्यम से एक साथी से दूसरे साथी के लिए भेजी जा रही हैं। उन पंक्तियों का संदेश काफी सटीक है जो इस परिस्थिति पर एकदम सटीक बात रखता है। वह जानकारी  नेट पर उपलब्ध तो है परंतु लेखक की जानकारी नहीं है। इसके साथ ही जिनकी लेखनी का यह कमाल है मैं कोटि-कोटि आभार व्यक्त करता हूं। पंक्तियां कुछ इस प्रकार हैं-

           
              हमने जीवन में कभी इस तरह की गड़बड़ नहीं देखी।

               हवा शुद्ध है लेकिन मास्क पहनना अनिवार्य है।

              सड़कें खाली हैं लेकिन लंबी ड्राइव पर जाना असंभव है।

               लोगों के हाथ साफ हैं लेकिन हाथ मिलाने पर प्रतिबंध है।

               दोस्तों के पास एक साथ बैठने का समय है लेकिन वे एक साथ नहीं मिल सकते।

               आपके अंदर का रसोइया पागल है, लेकिन आप किसी को भी लंच या डिनर पर नहीं बुला सकते।

               हर सोमवार को, दिल ऑफिस के लिए तरसता है लेकिन सप्ताहांत खत्म नहीं होता है।

               जिनके पास पैसा है, उनके पास इसे खर्च करने का कोई रास्ता नहीं है।

               जिनके पास पैसा नहीं है, उनके पास इसे कमाने का कोई रास्ता नहीं है।

               हाथ में पर्याप्त समय है लेकिन आप अपने सपनों को पूरा नहीं कर सकते।

               अपराधी चारों ओर है, लेकिन देखा नहीं जा सकता है।



               इस  बात के साथ कोरोना चुनौती के साथ, अवसर पर शायद में कुछ प्रकाश डाल पाया हूँ । साथ ही आप सभी से निवेदन है इस बीमारी ने जहां हमारे देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में हाहाकार मचा रखी है,  उस स्थिति में भी हम अपने घर पर रहते हुए देश की सर्वश्रेष्ठ सेवा कर सकते हैं। इसके साथ ही 17/05/2020 के बाद भी कोरोना का स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज के हर पहलू पर जो भी बदलाव आते हैं, उन पर भी आगे विचार रखने की कोशिश करूंगा।

                               ईश्वर को कोटि कोटि प्रणाम व सभी साथियों को नमस्कार🙏🏻

   चित्र आभार- freepik.com

       कोरोना संबंधित अभी तक जितनी पोस्ट आई हैं, उन सभी की link निम्नलिखित हैं-

वैश्विक व्याधि-

https://jeevanekavsar.blogspot.com/2020/04/22-04-2020-07-1.html?m=1

कोरोना चुनौती के साथ, अवसर (भाग 1)

https://jeevanekavsar.blogspot.com/2020/05/lockdownchunotikesathavsar1.html?m=1

कोरोना चुनौती के साथ, अवसर (भाग 2)

https://jeevanekavsar.blogspot.com/2020/05/part2.html?m=1

कोरोना के दौरान घर वापसी का अनुभव

https://jeevanekavsar.blogspot.com/2020/05/dailyroutine11052020.html?m=1



      जीवन एक अवसर संस्था के youtube चैनल की link आप सभी के लिए निम्नलिखित हैं, संस्था के कार्य को बेहतर बनाने हेतु आप youtube के द्वारा भी हमें सहयोग करें। आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद🙏🏻

                   https://youtu.be/nEK5kIIrR28




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