कोरोना के दौरान घर वापिसी का अनुभव



    "कोरोना के दौरान घर वापिसी का अनुभव"         


              ईश्वर को सादर प्रणाम व सभी साथियों को नमन🙏🏻

             आज दिनांक को कुछ पारिवारिक आवश्यक कार्य था। सुबह से विद्युत कटौती हो गई, तो मैं सुबह 10:00 बजे बुआजी के घर पर जाकर काम करना शुरू किया।  मैं काम कर रहा था, उसी दौरान बुआ के छोटे बेटे श्रीअंश ने कहा कि भैया आप youtube channel क्यों नहीं बनाते। तो मैंने अपने इंदौर के साथी श्री आशीष सर का बताया कि उन्होंने मुझे भी यूट्यूब चैनल बनाने को कहा है। मगर मैंने उनसे कहा कि कुछ समय रुक कर बनाऊंगा।  ऐसा मैंने अपने भाई को बताया इसके बाद हम दोनों ने यूट्यूब चैनल "जीवन एक अवसर संस्था" के नाम से बना दिया। जिसमें वीडियो के माध्यम से संस्था का परिचय देने का प्रयास किया है। 

             यूट्यूब पर वीडियो बनाने के बाद मैं सागर में स्थित लेहदरा नाका पहुंचा, क्योंकि मेरे परिवार के सदस्य इंदौर से सागर आ रहे थे। तो उन्हें शहर में अंदर ले आने व चिकित्सीय परीक्षण कराकर होम क्वॉरेंटाइन करवाना था। वहां जाकर मैंने lockdown में हुई ढील की वजह से जनता को अपने घरों की ओर वापस जाने की उनकी उत्सुकता को देखा, साथ ही उनकी परेशानी को भी बेहद नजदीकी से देखा और महसूस किया।

               यह कुछ चित्र है इन चित्रों में साफ दिख रहा है कि किस तरह कठिनाई से जूझ कर व्यक्ति घर जा रहे हैं, चाहे सिलेंडर के ट्रक के ऊपर बैठना पड़े या बसों में भी ऊपर बैठकर जाना पड़े।  यहां तक कि मैंने कुछ तीन पहिया ऑटो देखें जो महाराष्ट्र राज्य के थे। ऑटो चालक से बात की तो उन्होंने बताया कि ऑटो से ही वह महाराष्ट्र से अपने घर उत्तर प्रदेश जा रहे हैं क्योंकि और कोई वाहन व्यवस्था ना हो सकी।
        आज दिनांक तक सागर में इस प्रकार का दृश्य मैंने कभी नहीं देखा था। इस दृश्य को देखकर मैं कुछ अपने आपको विचलित महसूस कर रहा था कि कितने जतन से यह सभी घर जाने हेतु परेशान हैं। एक हम जो अपने घरों में हैं, तो बाहर जाने हेतु उतावले हो रहे हैं। आज के समय में जो अपने घरों में हैं, वह सभी बड़े सौभाग्यशाली हैं।
            इस कोरोना वायरस की वजह से घर के बाहर का जीवन बड़ा जटिल हो गया है। आप सभी से मेरा निवेदन है कि अगर हम घर पर रुकने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, तो एक बार अपने शहर के बाहर की सीमा पर जाकर देखें कि घर जाने हेतु व्यक्ति किस प्रकार कठिनाई उठा रहा है। शायद उनको देखकर हमें अपने घर में रहने मेंआनंद आने लगे व हम भगवान के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करें। कुछ निम्नलिखित पंक्तियों को रखकर मैं आज की अपनी बात पूरी करता हूं-

            "इंसान की चाहत है कि उड़ने को पर मिले,
            और परिंदे सोचते हैं कि रहने को घर मिले।।"

            आप सभी को कोटि-कोटि धन्यवाद व ईश्वर को प्रणाम🙏🏻
                                                           आपका सौमित्र पांडे

 पिछली पोस्ट पर जाने हेतु लिंक निम्नलिखित है-

https://jeevanekavsar.blogspot.com/2020/05/part2.html?m=1

जीवन एक अवसर संस्था का यूट्यूब चैनल देखने हेतु लिंक निम्नलिखित है-

https://youtu.be/nEK5kIIrR28



















Comments

Stay home safe livesबहुत अच्छे विचार
Shashwat pandey said…
मुश्किल वक्त है कट जाएगा खौफ का बादल छठ जाएगा
घर से बाहर जाना नहीं तो सर पर कोई चिंता नहीं��
बहुत बढ़िया शाश्वत भाई