"समस्या एक अवसर"
परमेश्वर को प्रणाम व सभी साथियों को नमस्कार व आप सभी द्वारा प्रदान किए गए सुझाव, सहयोग, प्रेम व समय हेतु आपका आभार। जैसा कि पोस्ट का शीर्षक है कि "समस्या एक अवसर", समस्या का हमारे जीवन में महत्व है। समस्या भी एक अवसर है, जो हमें अपनी क्षमताओं को निखारने का मौका प्रदान करती है। श्री विवेकानंद जी ने कहा है कि "किसी दिन जब आपके सामने कोई समस्या ना आए तो सुनिश्चित हो सकते हैं, कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं।"
उक्त बात से स्पष्ट है कि समस्या जो है, वह गलत नहीं है। अपितु समस्या इस बात का सूचक है कि जिस कार्य को हमने शुरू किया हैं, वह सही दिशा में बढ़ रहा है। इसके साथ ही समस्या का एक अर्थ चुनौती भी है। जब हमें कोई किसी प्रकार की चुनौती देता है, तो हम अपने आप में एक नई ऊर्जा का संचार महसूस करते हैं। इसके साथ हम विचार करते है कि इस कार्य को हम अवश्य करेंगे। यह सकारात्मक विचार हमारे मस्तिष्क को उस चुनौती को स्वीकार करके समाधान ढूंढने लगता है। बात हमारी निजी समस्या की हो तो हम पुरजोर प्रयास करके शीघ्रता से हल ढूंढने की कोशिश करते हैं। मगर समाज में जब कुछ समस्याएं आती हैं तो हम क्या करते हैं?
इस प्रश्न का जबाब एक कहानी के द्वारा रखने की कोशिश हैं कि एक बार एक नगर में कईं सालों तक बारिश नहीं हुई। भयंकर अकाल पड़ गया। खाने के लिए भी लोगों को दूसरे शहरों में जाना पड़ा। नदी, तालाब आदि सूखने से पशु-पक्षी मरने लगे। वहां का राजा ये सब देखकर बहुत दुखी हो गया। उसने सोचा इस समस्या का क्या उपाय किया जा सकता है। उपाय जानने के लिए राजा जंगल में एक साधु के पास गया। राजा ने उस साधु को पूरी बात बता दी।
साधु ने कहा कि नगर के बीचों-बीच एक कुआं है। कल अमावस की रात को नगर के सभी लोग उस कुएं में एक-एक लोटा दूध डालें तो तुम्हारे राज्य में बारिश हो सकती है। राजा साधु से उपाय जानकर अपने राज्य में लोट आया।
राजा ने नगरवासियों के बीच एलान करवाया कि कल अमावस की रात को सभी लोग नगर के बीच में जो कुआं है, उसमें अगर एक-एक लोटा दूध डालेंगे तो नगर में जल्दी ही बारिश हो सकती है और अकाल खत्म हो सकता है।
सामाजिक सकारात्मक चेतना के अभाव में नगर के प्रत्येक व्यक्ति ने सोचा कि मैं अगर दूध की जगह एक लोटा पानी डालूंगा तो कौन जानेगा कि दूध ना डाल कर मैंने पानी डाला है और मैं अपना दूध बचा लूंगा। इस तरह मात्र एक एक लोटा दूध बचाने के फेर में लोगों ने एक महत्त उद्देश्य और लक्ष्य को निष्फलित व्यर्थ कर दिया।
अगली सुबह जब राजा ने कुएं में जाकर देखा तो उसमें दूध की एक बूंद भी नहीं थी, सिर्फ पानी ही पानी था। राजा समझ गया कि सभी लोगों ने अंधेरे का फायदा उठाकर दूध की जगह पानी डाला है। अब आगे जो भी हुआ हो हमारे काम की बात यहीं आ गई और विचारणीय प्रश्न स्वयं से है कि हम या मैं समाज में पल रही बढ़ रही। उपरिवर्णित आख्यान की भांति सामाजिक नकारात्मक भावना के सहभागी तो नहीं बन रहे। हम समाज में अपनी जिम्मेदारी से पीछे तो नहीं हट रहे। यह विचार अवश्य करें।
समाज के प्रत्येक व्यक्ति जब जिम्मेदारी का निर्वहन करते हैं तो हम अपने आस पास काफी परिवर्तन कर सकते हैं। आवश्यकता सिर्फ अपना महत्व समझने की हैं। इसके साथ ही आप सभी को बहुत, बहुत धन्यवाद🙏🏻
आप अपना feedback जरूर दे। आप सभी का feedback व विचार मेरे लिए उतने जरूरी है जैसे कि "मछली के लिए पानी" पानी ही मछली का संसार हैं। उसी तरह आप सभी मेरे लिए पानी जितने महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ परमात्मा को प्रणाम व आप सभी को नमन🙏🏻
आप सभी के सहयोग, प्रेम, सुझाव व समय हेतु आपका आभारी
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आपने अपना समय मुझे प्रदान किया। ऐसे ही समय, सुझाव व समय देते रहे।
आपने अपना समय मुझे प्रदान किया। ऐसे ही समय, सुझाव व समय देते रहे। क्योंकि आप हम सभी जानते हैं कि प्रश्न मिल गया तो जबाब भी मिल ही जायेगा।
आपने अपना समय मुझे प्रदान किया। आपका फीडबैक ही मुझे लिखने हेतु प्रेरित करता है। आप सदैव अपनी प्रतिक्रिया करते रहे।धन्यवाद 🙏🏻