"खेजराधाम में विराजमान बाबा महाकाल और पाली में विराजमान हजारिया महादेव"
दिनांक 09.07.2023 को दोपहर परेड़ मंदिर से ग्राम खेजरा स्थित महाकाल मंदिर जाना तय हुआ। मैं और मामा शिवशंकर गौतम ग्राम खेजरा के लिए निकले, रास्ते में ललितपुर के पास स्थित मंदिर नीलकंठेश्वर त्रिमूर्ति, पाली की चर्चा हुई साथ ही झांसी मार्ग पर स्थित पाली शिव मंदिर की चर्चा हुई।
मौसम का आनंद लेते हुए हम खेजराधाम पहुँचे। खेजराधाम सागर से 28 किमी दूर स्थित हैं। खेजरा ग्राम में महाकाल धाम की तर्ज पर हूबहू महाकाल मंदिर बनाया गया है। मन्दिर का निर्माण सात साल में आए 108 पुष्य नक्षत्रों में कराया गया। मन्दिर में शिवलिंग, प्रवेश-निकास की डिजाइन महाकाल मंदिर की तर्ज पर ही बनाई गई है। मंदिर निर्माण की सबसे खास बात यह है कि इसका निर्माण कार्य सिर्फ पुष्य नक्षत्र के दिन ही किया गया है। यानी माह में सिर्फ एक दिन ही निर्माण हुआ।
गर्भ गृह के ठीक ऊपर दूसरा भवन बना हैं जिसमें माँ पार्वती व प्रभु शिव की प्रतिमा स्थित हैं। मंदिर के बाहर की तरफ राम दरबार व राधाकृष्ण मंदिर भी है। कालभैरव जी का मंदिर भी परिसर में है।
इस शिवलिंग में एक विशेष बात है जिसमें शिवलिंग के ऊपरी तरफ ॐ बना हुआ है, जिसकी जानकारी श्री रामविशाल तिवारी जी के माध्यम से प्राप्त हुई थी। इस मंदिर की जानकारी श्री तिवारी जी के माध्यम से मुझे मिली थी तब मेरा पहली बार मन्दिर जाना अगस्त 2022 में हुआ था और उस समय ॐ का दर्शन नहीं हो पाया था।
मन्दिर से निकलने के बाद सागर वापिस हो रहे थे तो मामा ने पाली चलने का पूछा तो मुख्य रास्ते पर आकर पाली की दूरी जानकारी ली और समय का अनुमान लगाते हुए पाली के लिए निकल गए। खेजराधाम धाम से 12 किलोमीटर आगे पाली स्थान है।
पाली में भगवान शिव का अद्वितीय मन्दिर स्थित है। मंदिर में प्रभु भोलेनाथ हजारिया महादेव रूप में विराजमान है। विग्रह में हजार शिवलिंग उकेरे हुए हैं। मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है और यह विशेष अवसरों पर ही खोला जाता है। सागर से पाली मालथौन रोड़ पर चालीस किमी दूर स्थित है। मंदिर अपनी आस्था के लिए पूरे बुंदेलखंड सहित मध्यप्रदेश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में खजुराहो के मंदिरों की तरह चारों तरफ उकेरे गए शिल्प अदभुत हैं। मंदिर में स्थित हजारी शिवलिंग से तात्पर्य है कि यहां स्थित शिवलिंग में एक हजार आठ शिवलिंग के छोटे छोटे आकार प्रदर्शित है। जिससे एक बार में ही एक हजार आठ शिवलिंगों के दर्शन का लाभ श्रद्धालु उठाते हैं। मन्दिर का निर्माण चंदेल शासकों ने कराया था। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ में भी एक पाली नामक ग्राम है जहां हूबहू इसी प्रकार का मंदिर बना हुआ है। इन दोनों मंदिरों का एक ही समय में निर्माण हुआ है।
और अंत में.......
जीवन में मिले सभी को,
शिव का आशीर्वाद,
शिव की भक्ति,
शिव सा साहस,
शिव सा त्याग,
शिव सा तपोबल,
शिव जैसी शान...
और
शिव का साथ।।
।।श्रावण सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएं।।
🙏जय श्री महाकाल🙏
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