सीख सिखाती घटनाएँ (क्रमांक 1)

 

                 सीख सिखाती घटनाएं-क्रमांक 1


           ईश्वर को  प्रणाम व सभी साथियों नमस्कार🙏

पिछले दिनों के वैश्विक घटनाक्रम की बातचीत करूं तो दो घटनाएं जिन्होंने हम सभी का ध्यान आकर्षित किया व साथ ही सभी जन को विचलित भी किया। उनमें से एक घटना 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत द्वारा आत्महत्या करना। इसके अतिरिक्त 15-16 जून की रात को चीन द्वारा हमला करना।
                  इन पर बात रखने के पूर्व मेरे जीवन में भी कुछ नकारात्मक घटनाएं घटी, जिनसे हमारी मित्र मंडली व हमारे शिक्षक परिवार में काफी प्रतिकूल वातावरण निर्मित हुआ।
           
               इन घटनाओं में से पहली घटना 10 जून 2020 की हैं, सुबह हमारे मित्र स्वर्गीय श्री अभिनव श्रीवास्तव का निधन हो गया। सभी साथियों में शोक व्याप्त था। मित्र अभिनव से सभी साथियों की कुछ ना कुछ यादें जुड़ी हुई हैं। श्री अभिनव पिछले लंबे समय से बीमारी से ग्रसित थे, वह बीमारी ही अंत में उनकी मौत का कारण बनी।
                ईश्वर से प्रार्थना है कि भगवान साथी की दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें व उनके परिवार को इस कठिन घड़ी में धैर्य व साहस दे।
                मेरे साथ श्री अभिनव की कुछ खट्टी मीठी यादें हैं, उनमें से अंतिम घटना जिसका मैं जिक्र करने जा रहा हूं। बात कुछ इस तरह है कि जब मैंने blog पर post लिखने की शुरुआत की। तो सभी मित्रों ने सहयोग व मार्गदर्शन प्रदान किया। उसी तरह या सभी मित्रों से आगे आकर सहयोग श्री अभिनव ने भी किया। यदि कहूं और यह बात रखूँ तो अतिशयोक्ति ना होगी क्योंकि उन दिनों में बिस्तर पर लेटे हुए, ना बोलने जैसी कठिन परिस्थिति में भी, मेरी मदद करना।
              जिससे कि मैं बेहतर और आकर्षक post बना पाऊं, blog के अकाउंट की सेटिंग व पेज को आकर्षक बनाने में पूरा सहयोग प्रदान किया। जिसकी वजह से मुझे काफी मदद मिली, इस बात का जिक्र में इसलिए कर रहा हूं कि जब जीवन में अभिनव को हम दोस्तों से कोई उम्मीद व आशा ना रही। उसके बाद भी श्री अभिनव अपने कठिन दौर में मेरी मदद करने का जज्बा रखे हुए थे, वही जज्बा मुझे अपने आप में या हम सभी को अपने आप में जगाने की आवश्यकता है।
             नहीं तो सामान्य जन की तरह वह भी रूचि ना दिखाता, ना परिवर्तन हेतु सुधार में अपना सहयोग देता और विचार करता कि इस कार्य में मदद करने से मुझे क्या लाभ होगा ?
            मगर साथी अभिनव ने ऐसा नहीं किया अपनी पिछली नौकरी के दौरान जो कार्य सीखा था, जाते-जाते अपने अंतिम समय में भी उस कार्य से मेरे कार्य को निखारने में पूरी मदद की। हम सभी भी ठीक इसी तरह का जज्बा बना पाए, यही प्रयास ही हम सभी की सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
            प्रभु से प्रार्थना है कि वो हम सभी को, दूसरों की निःस्वार्थ मदद करने की प्रेरणा व शक्ति प्रदान करें।
   
            साथ ही एक अफसोस है कि अंतिम समय में साथी अभिनव से मिलने घर नहीं पहुंच पाया। भले ही कई कारण हो जैसे कोरोना बीमारी, निजी कार्य में व्यस्त होना आदि मगर वह घड़ी वापस नहीं आ सकती। साथियों श्री अभिनव अपने व्यवहार की वजह से हमारी यादों में सदा जीवित रहेंगे। हम सभी को इस कठिन परिस्थिति में धैर्य व साहस रखते हुए उसके अच्छे कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए।

         इसी आशा और विश्वास के साथ आप सभी साथियों को धन्यवाद व ईश्वर को प्रणाम🙏
                            इसके आगे की बात आगामी पोस्ट में रखने की कोशिश करूंगा।🙏


चित्र आभार-
Gyanapp

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Comments

Shashwat pandey said…
बडे भाई अभिनव को भगवान अपने चरणो मे स्थान दे ।
श्रद्धाँजलि। लिखते रहें पढ़े भी।
सधन्यवाद,जी आदरणीय🙏
dj said…
विनम्र श्रद्धांजलि और ऐसे जिझारु व्यक्तित्व को शत शत नमन। ये जज़्बा ही हमे औरों से अलग बनाता है।
dj said…
जुझारू
जी बिल्कुल सही कहा आपने।