शिक्षा का अर्थ (विद्यालय अनुभव 02)

                          "शिक्षा का अर्थ"

   "जरूरी नहीं रोशनी चिरागो से ही हो, शिक्षा से भी घर रोशन होता है।।"


                  उक्त पंक्तियों में शिक्षा के दो अर्थ है मेरी दृष्टि में एक पाठ्यक्रम शिक्षा जिसे हम कक्षा व उम्र के अनुरूप ग्रहण करते हैं। दूसरी शिक्षा जन्म से प्रारंभ होकर मृत्यु तक सतत जारी रहती है, क्योंकि मेरे विचार से हम जब कोई कार्य कर रहे होते हैं तो उससे कुछ ना कुछ जरूर सीख रहे होते हैं। उस सीख के आधार पर ही हम निर्णय ले पाते हैं कि क्या उचित है और क्या अनुचित।इस आधार पर मेरा मानना है कि मैं सदा जीवन में सीखता रहता हूं। बात आज शिक्षा विभाग में नियुक्ति जुलाई 2013 से शाला के परिचय के साथ कुछ अनुभव की हैं। जिस अनुभव से शिक्षा व प्रेरणा लेकर मेरे जीवन  को नई दिशा मिली है।

                 जुलाई 2013 में उम्र 30 वर्ष पूरी होने को थी मगर जीवन में विद्यालय में पढ़ाने का कोई खास अनुभव नहीं था। प्राथमिक स्तर के बच्चों को पढ़ाने का बिल्कुल ही अनुभव नहीं था। कुछ बच्चों को दो बार होम ट्यूशन 2000 के आसपास मैंने अपनी पढ़ाई के साथ प्रदान की थी। सन 2001 में हायर सेकेंडरी की पढ़ाई गणित विषय से पूरी की कुछ मानसिक तैयारी, पारिवारिक स्थिति, शारीरिक व्याधि आदि के चलते 2001 से फरवरी 2012 तक एक अलग ही कार्य क्षेत्र व अनुभव रहा। अगर इन वर्षों में जो पाठ्यक्रम मैनेंअधूरे छोड़े हैं, उनको लिखने की कोशिश करूं तो शायद दो पोस्ट बन सकती हैं। फरवरी 2012 से जून 2013 तक का अनुभव शारीरिक व्याधि के चलते बिल्कुल अलग ही रहा, कभी उसको भी बताने का प्रयास करूंगा। मैंने 2013 के पूर्व कभी भी शासकीय सेवा में जाने को लेकर कोई ठोस प्रयास नहीं किए थे। मगर जीवन में बहुत कुछ हमारे मन के मुताबिक नहीं होता।

                    "ईश्वर वह नहीं देता जो हमें अच्छा लगता है बल्कि वह देता है जो हमारे लिए अच्छा होता है।" 


                कुछ इसी तरह शायद इस विभाग में मेरे लिए अच्छा होगा, इस तरह से मेरा मानना आज भी है और कुछ बीते हुए समय ने पहले ही इस बात को सिखा दिया था।
               8 जुलाई 2013 को शासकीय प्राथमिक शाला, औरिया में मैंने नियुक्ति ली। विद्यालय लगभग गांव के बीच में ही स्थित है।विद्यालय से लगा हुआ पीछे की तरफ जंगल है, बंदर उस समय भी आते थे और आज भी आते हैं। विद्यालय की प्रथम झलक को देखकर मैंने संतुष्टि महसूस की। पीछे के जंगल को देखकर बड़ा सुकून महसूस हुआ।

   
              उस समय प्राथमिक शाला व माध्यमिक शाला अलग-अलग संचालित होती थी। मेरा इंडक्शन प्रशिक्षण, सागर में हुआ। उसके बाद मुझे कक्षा 5 पढ़ाने हेतु आवंटित की गई। कक्षा में पढ़ाने के पहले दिन की घटना मुझे आज भी याद है कि मैम ने मुझे कक्षा में जाने को कहा। मगर पूरे दिन में कक्षा में जाने की हिम्मत ना कर पाया, वो बीच-बीच में आकर देखती और कक्षा में जाने के लिए पूछती मगर मैं चुपचाप कार्यालय में कुर्सी पर बैठा सोचता रहा कि क्या पढ़ाऊंगा और कैसे पढ़ाऊंगा।

                इसी तरह विचार करते-करते मैंने पूरा दिन व्यतीत कर दिया। इसके बाद पढ़ाने को लेकर सत्र में जो कुछ मैंने अनुभव किया।  वह आगे की पोस्ट में लिखने की कोशिश रहेगी। किसी घटना से प्राप्त होने वाली शिक्षा के माध्यम से मनुष्य का जीवन कैसे निखर जाता है। सत्र की घटनाओं से मेरा जीवन कैसे परिवर्तित हुआ व सकारात्मक परिवर्तन को  आगामी पोस्ट में रखने की कोशिश होगी।

                                                            सभी का धन्यवाद, ईश्वर को प्रणाम🙏🏻

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Comments

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आपका कोटि कोटि धन्यवाद सरजी
सर प्रयास करता हूँ कि इस बटन बनाने का।
आपका बहुत बहुत आभार🙏🏻