कोरोना चुनौती के साथ, अवसर (भाग 2)



   " कोरोना चुनौती के साथ, अवसर"

          ईश्वर को प्रणाम व साथियों को नमस्कार🙏🏻

                       "Mothers day"की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं, मां को समर्पित कुछ पंक्तियां निम्नलिखित हैं-

                              "बिगड़े हुए हालातों की तस्वीर बदल देती है,
                               मां की दुआएं औलाद की तकदीर बदल देती हैं।।"

          कोरोना चुनौती के साथ,अवसर (भाग1), दिनांक 3.05.2020 की चर्चा को आगे बढ़ाते हुए, आज की पोस्ट में कोरोना संबंधी कुछ और जानकारी को आपके समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास है। lockdown 3 में भारत के समस्त जिलों को तीन जोन में विभाजित किया गया। जोन का निर्धारण व नाम निम्नलिखित है-

         1. रेड जोन- रेड जोन में उन जिलों को शामिल किया गया जहां पर 15 से ज्यादा कोरोना केस हैं।

         2. ऑरेंज जोन-  उन जिलों को शामिल किया गया जहां पर 15 से कम कोरोना केस हैं।

         3.ग्रीन जोन- इस जोन में वे जिले शामिल है जिनमें पिछले 21 दिनों से कोई मामला नहीं आया हो।

        इस तरह विभाजन से भारत को 3 जोनों में बांटा गया और इसके पूर्व से लागू lockdown का बहुत गहरा प्रभाव जनता के जीवन पर सकारात्मक, आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति में हुई कठिनाई, पर्यावरण में सुधार आदि कई ऐसे प्रभावित क्षेत्र हैं, जिन पर इस पोस्ट के माध्यम से कुछ जानकारी साझा करने की कोशिश की गई है। जानकारी आपके समक्ष प्रस्तुत हैं-
   
       Lockdown का प्रभाव-  lockdown के तीनों चरणों में जन जीवन बहुत प्रभावित हुआ इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर विदेशों में lockdown का पालन कराया गया, उन सभी देशों में भी जनजीवन प्रभावित हुआ है। भारत में lockdown का प्रथम चरण 24 मार्च से 14 अप्रैल तक घोषित किया गया था, उस दौरान जनता घरों में कैद हो गई। lockdown में जनता को जरूरी काम को छोड़कर अपने घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी। इस दौरान अधिकतर सेवाएं प्रभावित हुई बस,ट्रांसपोर्ट, टैक्सी आदि सेवाएं बंद कर दी गई। इस दौरान स्कूल,मॉल,सिनेमा हॉल बंद कर दिए गए। कारखाने, प्राइवेट कंपनियां भी बंद कर दी गई, जिससे दैनिक रोजगार करने वाले मजदूरों का जीवन पूरी तरह बिखर गया। इसके अतिरिक्त कुछ शासकीय विभाग में अत्याधिक कार्य जैसे विशेष तौर पर स्वास्थ्य विभाग व पुलिस विभाग पर कार्य का बोझ अचानक से बढ़ गया। इन विभागों के अतिरिक्त बैंक, बीमा कंपनी, दूरसंचार सेवा प्रदाता, विद्युत विभाग, जल विभाग आदि विभागों में भी लगातार कार्य जारी रहा। इसके साथ ही दैनिक जरूरी संबंधी चीजों का मार्केट भी लगातार खुलता रहा। इसके साथ ही समयानुसार lockdown में परिवर्तन किया गया, जिससे कि जनजीवन कम से कम प्रभावित हो। lockdown 3.0 में पूरे भारत में कुछ विशेष छूट प्रदान की गई, जिससे कि जो भी जनता पिछले दिनों से एक ही स्थान पर भारत के विभिन्न स्थानों के लोग रुके हुए हैं, वे अपने घरों या कर्मचारी अपने कार्यक्षेत्र में पहुंच सकें, इस हेतु शासन ने ईपास, कुछ विशेष ट्रेन, बस आदि के माध्यम से यात्रा की व्यवस्था करने का प्रयास किया।  इस कार्य से भारत के विभिन्न राज्यों में फैले हुए अधिकतर मजदूर व कर्मचारी अपने सुनिश्चित स्थानों पर पहुंच सके।

       Lockdown का पर्यावरण पर प्रभाव- इस दौरान पर्यावरण में काफी सकारात्मक व लाभकारी बदलाव देखने को मिले हैं, क्योंकि इस दौरान वाहन, कारखाने पूर्णतः बंद हैं। जिसके कारण पर्यावरण में कई सुधार हुए, उनमें से कुछ सुधार निम्नलिखित हैं-

ओजोन परत में सुधार- कोरोनावायरस की रोकथाम हेतु पूरे विश्व में lockdown लागू किया गया। जिसकी वजह से विश्व के उद्योग पूर्णता बंद हो गए और औद्योगिक गतिविधियां रूक गई। औद्योगिक क्षेत्र बंद होने की वजह से पिछले कई दशकों से पृथ्वी पर हमारी रक्षा कर रही ओजान परत को जो उद्योगों से नुकसान पहुंच रहा था, उद्योगों के बंद होने से ओजोन परत में अत्याधिक सुधार आ गया हैं।

 कंपन कम हुआ- दुनिया भर में लोगों के क्वॉरेंटाइन में जाने व lockdown की वजह से मानवीय निर्मित कंपन कम हुआ है। विश्व भर में जारी बंद की वजह से इस तरह की कमी आई है। covid-19 के प्रसार को रोकने के लिए अपनाए गए बंद की वजह से मानव जनित भूकंपीय शोर में अनुमानित 30% की कमी आई है।

     प्रदूषण में कमी -  lockdown के दौरान सड़कों पर अधिकतर वाहनों की आवाजाही बंद है। निर्माण कार्य, कारखाने व अन्य दूसरे कार्य बंद होने से शहरों की हवा साफ हुई है। आगामी दिनों में lockdown के चलते वाहनों की आवाजाही नहीं होगी जिसके चलते प्रदूषण के स्तर में लगातार सुधार होने की संभावना है।


   नदियों की सफाई-  नदियों की सफाई को लेकर जो काम, भारत देश की कई सरकारें नहीं कर पाई । वो कार्य कोरोना वायरस से बचाव हेतु किए गए लोकडौन ने कर दिखाया।  अभी तक के lockdown की वजह से देश की प्रमुख नदियों में से, गंगा यमुना आज दिनांक तक जितनी शुद्ध व साफ हो गई है, इसके पहले इतनी साफ कभी नहीं देखी गई।  नदियों की सफाई हेतु सरकारों ने करोड़ों रुपए खर्च किए मगर आशा के अनुरूप सुधार कभी नहीं देखा गया। मगर इस lockdown की वजह से पर्यावरण व नदियों में बदलाव को देखकर खुशी महसूस हो रही है।

        उक्त बदलाव के अतिरिक्त पर्यावरण में बहुत बदलाव रोज महसूस किए जा रहे हैं। जैसे कि सामान्य जीवन में अक्षय तृतीया तक ठंडे पानी की आवश्यकता महसूस होने लगती थी, जो कि इस वर्ष महसूस नहीं हुई। इसके साथ ही पिछले वर्षों की तुलना में घर के बाहर मई माह में जो ठंडक रात 12:00 बजे के आसपास हम महसूस कर पाते थे, वही ठंडक हम आजकल lockdown के दौरान शाम 7:00 बजे के आसपास महसूस कर रहे हैं।

      इसके आगे की चर्चा अगली पोस्ट में करूंगा। साथियों विनय है और आप सभी को मीडिया के माध्यम से जानकारी प्राप्त हो ही रही हैं कि अब lockdown 3.0 के बाद की स्थिति संभवत बिगड़ सकती है। अतः हम सभी शासन का सहयोग करते हुए व्यक्तिगत सुरक्षा की जिम्मेदारी का वचन लेकर स्वयं, परिवार व समाज को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं ।हम अपनी जिम्मेदारी का पालन करते हुए इस महामारी की रोकथाम में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें।

      इन पंक्तियों के साथ बात को विराम देता हूं-
               
              पहुँच गई है गिनती हजारो में ,
              इसे लाख मत होने दो..
              रुक जाओ अपने घरों में
              वतन को राख मत होने दो…🙏


      ईश्वर को प्रणाम व आप सभी साथियों को धन्यवाद 🙏



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Comments

Anoop Dubey said…
लॉकडाउन पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव निश्चित ही सुखद है
ankit mishra said…
Very appropriately written covering all relevant issues.
Badal Chourasia said…
Just because of Corona not only the environment is getting clean and clear but also the humans have learned how to spend a Happy life
बहुत बहुत धन्यवाद, हम सभी अपनी क्षमताओं का आंकलन कर कार्य करे।
Shashwat pandey said…
लाॅकडाउन में कहीं फूल तो कहीं काँटें है।
तभी तो भारत में तीन जोन बाँटे है।
🙏
पाण्डेय जी अतिसुंदर.....
धन्यवाद लखनलाल सरजी
Anonymous said…
शानदार सूचना