"मौन का असर"

                   "मौन का असर"

          "ईश्वर को कोटि-कोटि प्रणाम,आप सभी साथियों में विराजमान परमात्मा के अंश को प्रणाम"🙏🏻

            " भाई अनूप दुबे को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं "🙏🏻

                    साथियों मेरी पिछली पोस्ट शब्दों के महत्व में हमने चर्चा की थी, कि शब्दों से ही हल निकलेगा।  परंतु आज का शीर्षक "मौन का असर" यह दोनों अपने आप में अलग-अलग सार्थकता रखे हैं। चूंकि आपका जीवन आपका प्रबंधन हैं। जैसे कि मौन सबसे बेहतर विकल्प हैं, विपरीत परिस्थिति में विवाद से बचने का। मगर आज के व्यस्त जीवन में यह कर पाना बड़ा विसंगत है। साथ ही पूर्ण मौन होने के लिए हम सांसारिक जीवन का त्याग कर जंगल में जाकर बैठ जाए वह भी कठिन है। 
                
                 " एक तो हम जाएंगे नहीं और दूसरे हमने वह जंगल बचने भी नहीं दिए।"

                 जहां जाकर पहले हमारे ऋषि मुनि मौन का आनंद प्राप्त करते थे। 
   
               मौन के भी दो रूप हैं, कई बार ऐसा होता है कि हम सामने वाले व्यक्ति से कुछ नहीं कह रहे हैं शब्दों से, अपितु इसके विपरीत हम मन से विचारों द्वारा अपनी गुस्सा निकाल ही रहे हैं, अपने आप में जो गुस्सा है वो व्यक्त कर ही रहे हैं, तो शायद यह मौन की श्रेणी में ना जाकर एक तरह की चुप्पी हैं।
               दूसरा वास्तविक मौन है कि बाहर से भी चुप व विचार भी चुप अर्थात ध्यान।

               मगर हम कहते हैं कि 'संसार में रहना हैं, तो कुछ ना कुछ तो कहना हैं।" शायद ऐसा नहीं हैं क्षणिक मौन भी जीवन में बहुत बड़ा बदलाव कर सकता है। इसको एक कहानी से समझते हैं ।कहानी कुछ इस प्रकार है-
       
             कुछ समय पहले की बात है। एक गांव में सास-बहू रहती थी। दोनों में छोटी- छोटी बातों पर लड़ाई होती रहती थी। सास अपना रसूख जमाने के लिए बहू को हमेशा खरी-खोटी सुनाया करती थी। बहू भी कुछ कम नहीं थी। वह भी सास पर अक्सर पलटवार किया करती थी और सास को ताने मारते हुए पानी पीकर कोसती रहती थी।

           एक दिन गांव में संत आए। बहू ने संत की काफी आवभागत की। संत बहू की सेवा से काफी प्रसन्न हुए। एक दिन मौका देखकर बहू ने संत से निवेदन किया कि, ' वह उसको कोई ऐसा उपाय बताए कि उसकी सास की बोलती बंद हो जाए। ' बहू के निवेदन करने पर संत ने कागज पर एक मंत्र लिखकर उसको दे दिया और कहा कि ' जब भी तुम्हारी सास तुमको बुरा-भला बोले तुम इस मंत्र को कागज पर लिखना और अपने दांतों के बीच दबा लेना। '

          दूसरे दिन जब सास ने बहू के साथ झगड़ा किया और उसको अपशब्द कहे तो बहू ने संत के कहे अनुसार किया और मंत्र को कागज पर लिखकर अपने दांतों के बीच दबा लिया। इस स्थिति में बहू सास को कोई जवाब नहीं दे पाई। यह सिलसिला लगातार दो-तीन दिनों तक चलता रहा। एक दिन सास ने बड़े प्रेम से बहू से कहा कि ' अब मैं तुमसे कभी नहीं लड़ाई करूंगी, क्योंकि अब तुमने मेरी गाली के जवाब में गाली देना बंद कर दिया है। ' बहू ने सोंचा मंत्र का असर हो गया है और सास ने हथियार डाल दिए हैं।

          दूसरे दिन बहू संत के पास गई और कहा कि ' मेरी सास पर आपके दिए हुए मंत्र का असर हो गया है और उसकी सास ने अब उससे लड़ाई करना बंद कर दिया है। ' संत ने बहू को जवाब देते हुए कहा कि ' यह मंत्र का नहीं मौन को असर है। '

           तो साथियों कुछ इस तरह हम परिवार में रिश्तेदारों में, कार्यालयों में, या हमारे आस पास अगर हम जवाब न दें तो कुछ दिनों में जैसे कि कहानी में घटा। वह हमारे जीवन में भी हो सकता है। सामने वाला सोचे कि मैं अकेला ही बुरा क्यों बोल रहा हूं।
         जीवन में कई बार हम आग को आग से बुझाने की कोशिश करते हैं। कि अगर मेरे विरोधी ने एक बात कही तो हम अपनी तरफ से एक की जगह दो बात कहेंगे। मौन का असर भी प्रयोग कर सकते हैं। जिंदगी हमारी है हमें कोशिश करना चाहिए, कि हम दूसरों द्वारा संचालित ना किए जाएं।
                                   
                                               "शांत रहेंगे तो खुश रहेंगे"

                                   " आप सभी मित्रों को धन्यवाद व ईश्वर को नमन🙏🏻"
                                                                      
     
        पिछली पोस्ट पर जाने हेतु लिंक- https://jeevanekavsar.blogspot.com/2020/05/jeevanniharonapninajarse.html?m=1














Comments

Shashwat pandey said…
मौन और मुस्कान दो शक्तिशाली हथियार होते हैं मौन रहकर कई बातों को दूर रखा जा सकता है तथा मुस्कान से कई बातें हल की जा सकती है👱🙏
Shrikant mishra said…
वर्तमान समय में बढते मानसिक तनाव और विभिन्न प्रकार के विवादों से बचने और शांंति बनाये रखने का प्रमुख साधन मौन ही है जिसकी शक्ति को आपने लेख के माध्यम से बहुत बेहतर ढंग से समझाया भैया
शाश्वत बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्रीकांत भाई बहुत-बहुत आभार।
Sandhya sahu said…
शानदार विचार आप के मौन पर कई लोग मौन या चुप्पी को सामने वाले की कमजोरी समझते है पर ऐसा नहीं है अगर सामने बाला कुछ कह नहीं रहा है तो यह उसकी सहन शीलता का प्रमाण है
Unknown said…
Very nice bhaiya
Anoop Dubey said…
बहुत ही प्रेरक विचार।
हम इसे अपने जीवन में उतार लें तो काफी समस्याओं का समाधान हो जाए।
🙏🏻 कोटि कोटि धन्यवाद।
🙏🏻बहुत बहुत आभार।
Narendra singh said…
मौन का अर्थ अन्दर और बाहर से चुप रहना है।

आमतौर पर हम ‘मौन’ का अर्थ होंठों का ना चलना माना जाता है। यह बड़ा सीमित अर्थ है।
Narendra singh said…
कबीर ने कहा है:


कबीरा यह गत अटपटी, चटपट लखि न जाए। जब मन की खटपट मिटे, अधर भया ठहराय।

अधर मतलब होंठ। होंठ वास्तव में तभी ठहरेंगें, तभी शान्त होंगे, जब मन की खटपट मिट जायेगी। हमारे होंठ भी ज्यादा इसीलिए चलते हैं क्योंकि मन अशान्त है, और जब तक मन अशान्त है, तब तक होंठ चलें या न चलें कोई अन्तर नहीं क्योंकि मूल बात तो मन की अशान्ति है। वो बनी हुई हैl
बहुत बढिया, नरेंद्र भाई
धन्यवाद जतिन भाई