"जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि"
ईश्वर को प्रणाम व सभी साथियों को नमस्कार 🙏🏻
आज दिनांक 22/05/2020 को शाला परिवार के
श्री राजेश ठाकुर जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं
प्रभु से प्रार्थना है कि भगवान आपको दीर्घायु प्रदान करें व पूर्ण शारीरिक रूप से स्वस्थ व सक्षम रखें।
आज के दिन की चर्चा आप पर केंद्रित है, साथ ही हमारी जैसी दृष्टि होती है वैसी सृष्टि नजर आती है। इस पर कुछ बात रखने की कोशिश मेरी इस पोस्ट के माध्यम से है।
मेरा मानना है कि अगर कोई व्यक्ति हमें अपने जीवन का समय दे रहा है, तो समय से अधिक मूल्यवान उपहार कोई नहीं हो सकता है और उस उपहार की तुलना किसी और वस्तु से नहीं की जा सकती, क्योंकि मनुष्य के जीवन में समय कभी वापस नहीं आता है।अपितु अन्य सामग्री पुनः प्राप्त की जा सकती है।
कुछ इसी तरह शाला परिवार के कई सदस्य हैं, जो अपनी दिनचर्या का अधिक से अधिक समय शाला में सकारात्मक विचार व शाला के विकास हेतु प्रदान कर रहे हैं। उनमें से हमारे एक साथी राजेश भाई हैं। इनसे मेरा परिचय वैसे गांव में नियुक्ति के समय से ही शायद नमस्कार का रहा होगा, मगर जो पहली मुलाकात विद्यालय हित में रही, वह मुलाकात सत्र 2016-17 के समय हुई।
शासन द्वारा विद्यालय में विद्युत कनेक्शन कराए गए। विद्युत कनेक्शन के बाद शाला परिवार द्वारा सामूहिक मदद करके, प्राथमिक शाला परिसर के सभी कक्षाओं में विद्युत फिटिंग कराई गई। इस कार्य को पूर्ण कराने के बाद विद्युत नियमित रूप से प्राप्त नहीं हो रही थी। आए दिन कुछ ना कुछ त्रुटि बनती और विद्युत प्रवाह अवरुद्ध हो जाता। विद्युत विभाग द्वारा नियमित आग्रह करने पर कोई ना कोई कर्मचारी आता और विद्युत में आ रही समस्या को ठीक करके वापस चला जाता। ऐसा लगभग एक माह चला होगा। इसमें हम सभी साथियों ने भरपूर प्रयास किया, फिर भी विद्युत प्रवाह ठीक नहीं हो पाया।
इसी दौरान विद्युत प्रवाह अवरुद्ध हुआ और इस बार वह उचित समय आ गया जब मेरी सीधी मुलाकात राजेश भाई से हुई और इन्होंने मुझे सलाह दी और विद्युत ठीक करने के कुछ तरीके बताएं। तो मैंने कहा कि मुझे ज्यादा विद्युत की समझ नहीं है, तो आप सलाह के साथ सहयोग व समय दें जिससे कि यह कार्य सकुशल पूर्ण हो सके, नहीं तो सभी सलाह दे रहे हैं मगर मेरी समझ स्पष्ट न होने के कारण सलाह व्यर्थ चली जाती है। तो राजेश भाई ने खड़े होकर सलाह, सहयोग प्रदान करते हुए विद्युत समस्या को पूर्ण रूप से भली-भांति ठीक कराया।
भाग्य से उस दिन श्री संतोष ठाकुर (गुड्डू भाई ) विद्युत विभाग की ओर से आए और लगभग 4 घंटे से अधिक समय तक आप दोनों ने भरपूर प्रयास कर विद्युत समस्या को भली-भांति रूप से ठीक कर दिया। उस दिन से आप आज दिनांक 22/05/2020 तक आप शाला परिवार से सतत रूप से जुड़े हैं व शाला के कई कार्य मैं आप सक्रिय सहभागिता निभाते हैं। आगे भविष्य में शाला के कार्यों की विस्तृत चर्चा में आपके अन्य कार्यों की चर्चा को भविष्य में करने का प्रयास रहेगा।
प्रभु से विनय है कि आपका शाला के प्रति स्नेह सदैव बना रहे व साथ ही शाला परिवार में हम सभी के रिश्ते प्रेम पूर्ण बने रहे।
दरअसल यह दृष्टि और सृष्टि का मामला है, मनुष्य की जैसी दृष्टि होगी वैसे उसकी सोच बनेगी और जैसी सोच होगी वैसा उसे नजर आएगा। फिल्म मदर इंडिया की गीत की पंक्तियों के साथ मैं आज की बात पूरी करता हूं-
"न मैं भगवान हूँ न मैं शैतान हूँ
दुनिया जो चाहे समझे मैं तो इंसान हूँ
मुझ में भलाई भी मुझ में बुराई भी
लाखों हैं मैल दिल में थोड़ी सफ़ाई भी
थोड़ा सा नेक हूँ थोड़ा बेईमान हूँ
दुनिया जो चाहे समझे मैं तो इंसान हूँ
न कोई राज है न सर पर ताज है
फिर भी हमारे दम से धरती की लाज है
तन का ग़रीब हूँ मन का धनवान हूँ
दुनिया जो चाहे समझे मैं तो इंसान हूँ
जीवन का गीत है सुर में न ताल में
उलझी है सारी दुनिया रोटी के जाल में
कैसा अँधेर है मैं भी हैरान हूँ
दुनिया जो चाहे समझे मैं तो इंसान हूँ।।"
आज के दिन की चर्चा आप पर केंद्रित है, साथ ही हमारी जैसी दृष्टि होती है वैसी सृष्टि नजर आती है। इस पर कुछ बात रखने की कोशिश मेरी इस पोस्ट के माध्यम से है।
मेरा मानना है कि अगर कोई व्यक्ति हमें अपने जीवन का समय दे रहा है, तो समय से अधिक मूल्यवान उपहार कोई नहीं हो सकता है और उस उपहार की तुलना किसी और वस्तु से नहीं की जा सकती, क्योंकि मनुष्य के जीवन में समय कभी वापस नहीं आता है।अपितु अन्य सामग्री पुनः प्राप्त की जा सकती है।
कुछ इसी तरह शाला परिवार के कई सदस्य हैं, जो अपनी दिनचर्या का अधिक से अधिक समय शाला में सकारात्मक विचार व शाला के विकास हेतु प्रदान कर रहे हैं। उनमें से हमारे एक साथी राजेश भाई हैं। इनसे मेरा परिचय वैसे गांव में नियुक्ति के समय से ही शायद नमस्कार का रहा होगा, मगर जो पहली मुलाकात विद्यालय हित में रही, वह मुलाकात सत्र 2016-17 के समय हुई।
शासन द्वारा विद्यालय में विद्युत कनेक्शन कराए गए। विद्युत कनेक्शन के बाद शाला परिवार द्वारा सामूहिक मदद करके, प्राथमिक शाला परिसर के सभी कक्षाओं में विद्युत फिटिंग कराई गई। इस कार्य को पूर्ण कराने के बाद विद्युत नियमित रूप से प्राप्त नहीं हो रही थी। आए दिन कुछ ना कुछ त्रुटि बनती और विद्युत प्रवाह अवरुद्ध हो जाता। विद्युत विभाग द्वारा नियमित आग्रह करने पर कोई ना कोई कर्मचारी आता और विद्युत में आ रही समस्या को ठीक करके वापस चला जाता। ऐसा लगभग एक माह चला होगा। इसमें हम सभी साथियों ने भरपूर प्रयास किया, फिर भी विद्युत प्रवाह ठीक नहीं हो पाया।
इसी दौरान विद्युत प्रवाह अवरुद्ध हुआ और इस बार वह उचित समय आ गया जब मेरी सीधी मुलाकात राजेश भाई से हुई और इन्होंने मुझे सलाह दी और विद्युत ठीक करने के कुछ तरीके बताएं। तो मैंने कहा कि मुझे ज्यादा विद्युत की समझ नहीं है, तो आप सलाह के साथ सहयोग व समय दें जिससे कि यह कार्य सकुशल पूर्ण हो सके, नहीं तो सभी सलाह दे रहे हैं मगर मेरी समझ स्पष्ट न होने के कारण सलाह व्यर्थ चली जाती है। तो राजेश भाई ने खड़े होकर सलाह, सहयोग प्रदान करते हुए विद्युत समस्या को पूर्ण रूप से भली-भांति ठीक कराया।
भाग्य से उस दिन श्री संतोष ठाकुर (गुड्डू भाई ) विद्युत विभाग की ओर से आए और लगभग 4 घंटे से अधिक समय तक आप दोनों ने भरपूर प्रयास कर विद्युत समस्या को भली-भांति रूप से ठीक कर दिया। उस दिन से आप आज दिनांक 22/05/2020 तक आप शाला परिवार से सतत रूप से जुड़े हैं व शाला के कई कार्य मैं आप सक्रिय सहभागिता निभाते हैं। आगे भविष्य में शाला के कार्यों की विस्तृत चर्चा में आपके अन्य कार्यों की चर्चा को भविष्य में करने का प्रयास रहेगा।
प्रभु से विनय है कि आपका शाला के प्रति स्नेह सदैव बना रहे व साथ ही शाला परिवार में हम सभी के रिश्ते प्रेम पूर्ण बने रहे।
दरअसल यह दृष्टि और सृष्टि का मामला है, मनुष्य की जैसी दृष्टि होगी वैसे उसकी सोच बनेगी और जैसी सोच होगी वैसा उसे नजर आएगा। फिल्म मदर इंडिया की गीत की पंक्तियों के साथ मैं आज की बात पूरी करता हूं-
"न मैं भगवान हूँ न मैं शैतान हूँ
दुनिया जो चाहे समझे मैं तो इंसान हूँ
मुझ में भलाई भी मुझ में बुराई भी
लाखों हैं मैल दिल में थोड़ी सफ़ाई भी
थोड़ा सा नेक हूँ थोड़ा बेईमान हूँ
दुनिया जो चाहे समझे मैं तो इंसान हूँ
न कोई राज है न सर पर ताज है
फिर भी हमारे दम से धरती की लाज है
तन का ग़रीब हूँ मन का धनवान हूँ
दुनिया जो चाहे समझे मैं तो इंसान हूँ
जीवन का गीत है सुर में न ताल में
उलझी है सारी दुनिया रोटी के जाल में
कैसा अँधेर है मैं भी हैरान हूँ
दुनिया जो चाहे समझे मैं तो इंसान हूँ।।"
बस देखने वाली बात है कि सामने वाले को हम क्या समझते हैं ? जैसा हम समझते हैं, जैसा हम सोचते हैं, वैसा हमें सामने वाला नजर आता है।
चित्र आभार- your quote
ईश्वर को प्रणाम व आप सभी साथियों को नमस्कार🙏🏻
चित्र आभार- your quote
ईश्वर को प्रणाम व आप सभी साथियों को नमस्कार🙏🏻


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सराहनीय