अभिमान अच्छा नहीं


   

                   "अभिमान अच्छा नहीं"

            ईश्वर को प्रणाम व  सभी साथियों को नमस्कार 🙏🏻

                     आज हमारे मित्र श्री परमल विश्नोई जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आपका साथ प्रथम बार 2013 में प्राप्त हुआ था, उस समय विद्यालय में प्रथम संस्था द्वारा आयोजित एक प्रोजेक्ट में आप से परिचय हुआ था। पिछले सत्र 2019-20 मैं आपने शाला परिसर में आयोजित कार्यों में रुचि लेकर पर्याप्त समय व संस्था को सहयोग प्रदान किया।                                    
                    शाला परिवार में आपका सहयोग सक्रिय सदस्य के रूप में सदैव प्राप्त होता रहे। ऐसी आशा व विश्वास है भगवान आपको व हमारी टीम के स्नेह को सदैव बनाए रखें। आप आज भी वर्तमान समय में प्रथम संस्था, जो कि शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही है। उसमें कार्य कर रहे हैं।
                  "जीवन एक अवसर" नाम के कुछ whatsapp group बनाएं गए हैं, जिनमें post को शेयर किया जाता है। हमारे साथी लेखन में सहायक व प्रेरणादायक जानकारी अक्सर साझा करते हैं। जिसे मैं अपना आधार बनाकर कभी-2 post बना लेता हूं। आज एक बहुत प्यारा भजन मित्र द्वारा भेजा गया वह भजन निम्नलिखित है-

                 मत कर तू अभिमान रे बंदे, जूठी तेरी शान रे ।
                 मत कर तू अभिमान ॥

                 तेरे जैसे लाखों आये, लाखों इस माटी ने खाए ।
                 रहा ना नाम निशान रे बंदे, मत कर तू अभिमान ॥

                 माया का अन्धकार निराला, बाहर उजला अन्दर काला ।
                 इस को तू पहचान रे बंदे, मत कर तू अभिमान ॥

                  तेरे पास हैं हीरे मोती, मेरे मन मंदिर में ज्योति ।
                  कौन हुआ धनवान रे बंदे, मत कर तू अभिमान ॥।            मैथिली ठाकुर, ऋषभ ठाकुर, अयाची ठाकुर

                 इस भजन में अभिमान न करने की प्रेरणा प्राप्त हो रही है। अभिमान, घमंड, गर्व और अहंकार आदि शब्द है । मगर कई बार इन शब्दों की हमें आवश्यकता पड़ती है और व्यवहारिक जीवन में उपयोग करते हैं। ये शब्द अपने आप को समझने में भी सहायक होते हैं "मैं हूं"। अपने आपको जानने के बाद मिथ्याभिमान से जब व्यक्ति कहता है "मैं ही हूं"। यह अहंकार हानिकारक होता है, तो इस तरह हम अहंकार से ग्रसित होकर अपना नुकसान कर बैठते हैं।

               कुछ पंक्तियां निम्नलिखित प्रस्तुत है-

       "घमंड न करना जिंदगी में तकदीर बदलती रहती है।
       शीशा वही रहता है बस तस्वीर बदलती रहती है।।"

               इन्हीं पंक्तियों के साथ मैं अपनी बात को विराम देता हूं।
           
               ईश्वर को नमन और आप सभी को सादर प्रणाम🙏🏻
                                                         

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        भजन को वीडियो में देखने हेतु लिंक- https://youtu.be/8k_jfilUNUw


Comments

Shiva goutam said…
Mat kar re abhiman re
Anoop Dubey said…
पूर्णतः सत्य
मानव जीवन को सार्थक करने वाला लेख है। बहुत बहुत सुंदर प्रयास पाण्डेयजी।
कोटि कोटि धन्यवाद श्रीमान जी🙏🏻