" जब भी सोचें, तो बड़ा सोचें"

         "जब भी सोचें, तो बड़ा सोचें"
             ईश्वर को नमन व आप सभी को नमस्कार 🙏🏻
                श्री नीरज पांडे जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।
   बात कुछ इस तरह है कि मन में हम लगातार सोचते रहते हैं, दो स्थिति हैं मुख्यतः मौत या ध्यान, जहां हम सोचना बंद करते हैं। सोचना गलत नहीं है, मगर गलत सोचना व गलत उद्देश्य हेतु सोचना गलत है। जब भी जीवन में हम विचार करें और सकारात्मक उद्देश्य के बारे में सोच रहे हैं तो सोचना गलत हो हीं नहीं सकता। हम जीवन में सोच कर सही दिशा में कार्य करें, तो प्रकृति भी हमारा भरपूर सहयोग करती है-

                          "कहते है अगर किसी चीज को दिल से चाहो तो पूरी कायनात,

                                    उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है।"

                 इस तरह से जब भी हम सोचे सकारात्मक दिशा में,  विचार करें तो बड़ा ही सोचें और योजनाबद्ध तरीके से भी सोचें। बड़े सोचने को लेकर एक कहानी के माध्यम से बात रखता हूं कहानी कुछ इस तरह है -

                  एक बार एक बहुत गरीब परिवार का बेरोजगार युवक नौकरी की तलाश में किसी दूसरे शहर जाने के लिए रेलगाड़ी से सफ़र कर रहा था | घर में कभी-कभार ही सब्जी बनती थी, इसलिए उसने रास्ते में खाने के लिए सिर्फ रोटियां ही रखी थी |आधा रास्ता गुजर जाने के बाद उसे भूख लगने लगी, और वह टिफिन में से रोटियां निकाल कर खाने लगा | उसके खाने का तरीका कुछ अजीब था , वह रोटी का एक टुकड़ा लेता और उसे टिफिन के अन्दर कुछ ऐसे डालता मानो रोटी के साथ कुछ और भी खा रहा हो, जबकि उसके पास तो सिर्फ रोटियां ही थीं !

                  उसकी इस हरकत को आस पास के और दूसरे यात्री देख कर हैरान हो रहे थे | वह युवक हर बार रोटी का एक टुकड़ा लेता और झूठमूठ का टिफिन में डालता और खाता | सभी सोच रहे थे कि आखिर वह युवक ऐसा क्यों कर रहा था | आखिरकार एक व्यक्ति से रहा नहीं गया और उसने उससे पूछ ही लिया कि भैया तुम ऐसा क्यों कर रहे हो, तुम्हारे पास सब्जी तो है ही नहीं, फिर रोटी के टुकड़े को हर बार खाली टिफिन में डालकर ऐसे खा रहे हो मानो उसमे सब्जी हो |
                  तब उस युवक ने जवाब दिया, “भैया , इस खाली ढक्कन में सब्जी नहीं है लेकिन मै अपने मन में यह सोच कर खा रहा हूँ कि इसमें बहुत सारा आचार है, मै आचार के साथ रोटी खा रहा हूँ |”

                  फिर व्यक्ति ने पूछा , “खाली ढक्कन में आचार सोच कर सूखी रोटी को खा रहे हो तो क्या तुम्हे आचार का स्वाद आ रहा है ?”

                “हाँ, बिलकुल आ रहा है , मै रोटी के साथ अचार सोचकर खा रहा हूँ और मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा है |”, युवक ने जवाब दिया|

                उसकी इस बात को आसपास के यात्रियों ने भी सुना, और उन्ही में से एक व्यक्ति बोला , “कि भाई ! जब तुम्हे सोचना ही था तो तुम आचार की जगह पर कुछ अच्छी सी सब्जी सोचते जैसे, मटर पनीर , शाही पनीर, मलाई कोफ्ता आदि ….तुम्हे इनका स्वाद भी मिल जाता | तुम्हारे कहने के मुताबिक तुमने आचार सोचा तो तुम्हे आचार का स्वाद आया तो अगर तुम और स्वादिष्ट चीजों के बारे में सोचते तो उनका स्वाद भी तुम्हे आता | जब सोचना ही था तो भला छोटा क्यों सोचो बड़ा क्यों नहीं, तुम्हे तो बड़ा सोचना चाहिए था |”

                साथियों, ये बात हमारी ज़िंदगी के हर पल में लागू होती है | हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं और फिर हमें वैसे ही आनंद आने लगता है | कभी कभी हम बहुत छोटा सोचते हैं और हम उसी के अनुसार कार्य करने लग जाते हैं। बाद में जब वक़्त गुजर जाता है तो हमें एहसास होता है कि अगर हमने थोड़ा और बड़ा और बेहतर सोचा होता तो शायद ज़िंदगी बदल भी सकती थी |

                इसलिए दोस्तों , हमेशा बड़े सपने देखो , बड़ा सोचो , बड़े लक्ष्य बनाओ | जब हमारी सोच बड़ी होगी तभी हम कुछ बड़ा कर सकते हैं और तभी हमें कुछ बड़ा मिलेगा |
             
                 इसके साथ ही एक विचार और हम अपने साथ रखें, कि अगर हमने बड़ा सोचा है, हम बड़ा लक्ष्य निर्धारित करते हैं और वह पूर्ण नहीं हो पाता है। तो हमारे लिए अवसाद ग्रसित नहीं होना है क्योंकि सही सोचने वाला वही है जो सकारात्मक सोच के साथ, पूर्ण निष्ठा लगन के साथ कार्य करें। और यदि किसी कारणवश मन के अनुरूप परिणाम प्राप्त ना हो  तो वहां पर अवसाद ग्रसित ना हो। सकारात्मक  सोच के साथ कार्य को पुनः करें।  क्योंकि हर किसी को एक बार में ही सफलता प्राप्त नहीं हो सकती। सफल होने हेतु बड़ी प्यारी कविता हैं, जिसे आप सभी ने सुना ही होगा। इस कविता से प्रेरणा लेनी चाहिए-
           
             लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती                                             


            कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।।

             नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
             चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
             मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
             चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
             आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
              कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।।

               डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
               जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।।
               मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
                बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में,
                मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
                कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।।

                 असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो,
                 क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो,
                 जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
                 संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम,
                 कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
                 कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।।
    
                         उक्त आख्यान व कविता को हम अपने जीवन की सम विषम परिस्थिति में प्रयोग करें। इसी के साथ ईश्वर को प्रणाम व आप सभी को नमन🙏🏻
                                         
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Comments

Bahut hi accha sandesh diya h bhaiya is kahani ke madhyam se
धन्यवाद बहिन🙏🏻
Unknown said…
सौमित्र भाई आपके द्वारा जो लेख प्रस्तुत किए जाते हैं वह बहुत ही प्रेरक होते हैं इसके लिए आपका धन्यवाद आपके इस लेख जब भी सोचें .....










को पढ़कर बहुत प्रेरणा मिली ऐसा ही एक प्रेरक प्रसंग मैंने पढ़ा कि आप किसी भी क्षेत्र में हो उस क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ बनाने का प्रयास करें चाहे वह क्षेत्र मोची अर्थात जूते बनाने का का ही क्यों ना हो
Sandhya sahu said…
सबसे पहले तो आप की सोच को नमन करती हूं कि आप टॉपिक बहुत अच्छे लेते है जैसे कि इसी टॉपिक को ही लें कि जब भी सोचो बड़ा सोचो जब तक हमारे सपने बड़े नहीं होंगे हम कैसे उन्हें पूरे करने के लिए बड़ा सा प्रयास करेंगे तो बिल्कुल सही बात। की हमें हमेशा अपनी सोच बड़ी रखनी है
धन्यवाद आदरणीय,प्रोत्साहित व ऊर्जान्वित करने हेतु बहुत बहुत आभार🙏🏻
🙏🏻आपका बहुत बहुत आभार, आप सभी की सराहना से मैं स्वयं को ऊर्जान्वित करके, इसी तरह शिक्षा व समाज में कार्य करता रहूँ।
Unknown said…
Achchhi soch he saphalta ki kunji he nice shoumitra Bhai

सधन्यवाद आपको🙏🏻
Jatin parmar said…
बहुत बढ़िया सर जी।।
धन्यवाद,जतिन भाई