बूँद-बूँद से घड़ा भरता हैं....

               "किसी भी बड़े काम की शुरूआत छोटे काम से ही होती हैं"


                              सभी साथियों को नमस्कार आप सभी से स्नेह, विश्वास व समय मिल रहा है। बीते हुए कल के blog की post को पढ़ने के लिए आपके द्वारा दिए गए समय, सहयोग व सुझाव के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। आप सभी मित्रों ने whatsapp group पर सराहना, समय व सहमति प्रदान की। इस हेतु भी मैं आपका आभारी हूँ। इसके साथ ही कुछ ऐसे मित्र भी होंगे जिनसे मेरा सीधा संपर्क नहीं है उन्होंने भी मेरे blog पर post पढ़ने के लिए समय, सुझाव दिए उन सभी मित्रों का भी कोटि कोटि धन्यवाद।
                               हम सभी ने वर्ष 2014 से जो कार्य प्रारंभ किया है उस पर प्रत्येक पिछले वर्षों में किए गए कार्यों की चर्चा post के माध्यम से बताने का प्रयास में धीरे-धीरे प्रयास करता रहूंगा। ये post मेरे उन साथियों के लिए हैं जिनने सिर्फ सुना है या वो दूसरे साथी जो एक दूसरे के माध्यम से जुड़े हैं उन्हें भी कार्य को समझने का मौका मिलेगा और ये एक तरह से दस्तावेज भी हो जाएगा जिसको और भी नए साथी समय-समय पर पढ़ के समझ पाएंगे। इसके साथ ही हमारे अपने दूसरे साथियों को आप सभी आसानी से send कर के बता पाएंगे। यहां पर मैं आपसे यह कहना चाहता हूँ कि जैसे एक मुहावरा हैं कि "अपने मुँह मियां मिट्ठू" ये कार्य में बिल्कुल भी नहीं कर रहा हूँ। अगर मेरे शब्दों से ऐसा प्रतीत हो तो माफ कीजियेगा। इसके पहले भी कुछ सीमित मित्रों तक ये बात मैं बताता था फिर समय के साथ कुछ मित्रों ने सुझाव दिया व कुछ विभाग के सम्मानीय अधिकारियों ने भी सराहा और कहा कि इसको अधिक से अधिक बताने का प्रयास करो जिससे कि तुम्हारी तरह और तुम्हारी टीम की तरह कार्य करने की दूसरे साथियों को प्रेरणा मिले। जैसा कि दिनांक 23.04.2020 के लेख में मैंने बताने का प्रयास किया है कि मैं एक मात्र निमित्त हूँ वो परमात्मा करा रहे हैं मैं सिर्फ कर पा रहा हूँ उनके आशीर्वाद से, छात्र-छात्राओं के भाग्य से व आप सभी के विश्वास, स्नेह, सहयोग के माध्यम से।
                           ये प्रयास हमारी टीम , हमारी शक्ति को बढ़ाने का माध्यम है जिससे कि हम ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़कर शिक्षा व समाज मे सामाजिक कार्यों को कर सके। इस हेतु आप सभी को पहले से ही ज्ञात है कि " बूंद-बूंद से घड़ा भरता है" तो हम सभी अपने हिस्से का कार्य करें। एक विचार मानवीय स्वभाव के चलते हम सभी के मन में आता हैं कि मेरे एक के अकेले करने से क्या होगा। तो आप सभी ने पूर्व में जरूर ये कहानी पढ़ी होगी या सुनी होगी। मैं सिर्फ उसको एक बार पुनः लिखकर आपको आपकी शक्ति याद कराने का प्रयास कर रहा हूँ, ठीक उसी तरह जिस प्रकार 
  " प्रभु श्री हनुमान जी को श्री जामवंतजी ने सुंदरकांड में माँ सीताजी की खोज" हेतु कराई थीं।
           यहाँ पर आप सभी से विनय हैं कि शब्दों के चयन में त्रुटि हुई हो तो मुझे क्षमा करें क्योंकि मैं भी आपके बीच का ही छोटा विद्यार्थी हूँ। जो उस परमेश्वर की उंगली पकड़ कर नित्य चलना सीख रहा हूँ। अब वो कहानी जिसे सभी ने कही ना कहीं और कभी ना कभी सुना होगा। 
              कहानी कुछ इस तरह से शुरु होती है कि एक वृद्ध व्यक्ति समुद्र किनारे टहल रहा था। उसने वहां देखा कि समुद्र की सैकडों बड़ी और भारी मछलियां बहाव के साथ किनारे की रेत पर आ गई हैं और तडप रही हैं। वहीं एक छोटा बच्चा उन बड़ी और भारी मछलियों को उठाकर वापस समुद्र में डाल रहा था। बच्चा एक-एक मछली को उठाकर समुद्र के पानी तक ले जाने में काफी समय लग रहा था।
             वृद्ध ने उस छोटे से बच्चे से पूछा कि समुद्र के किनारे रेत पर तो सैकडों मछलियां मर रही हैं, आठ-दस मछलियां समुद्र में डालने से क्या होगा? इन सैकडों मछलियों की जान तो बच नहीं पाएगी। बेटा फिर क्यों इतनी मेहनत कर रहे हो?
वृद्ध की बात सुनकर उस छोटे से बच्चे ने एक और मछली उठाकर समुद्र में ले जाते हुए कहा कि कम से कम इस एक मछली की तो जान बच ही जाएगी।
           हम जब भी कोई बड़ा काम करना चाहते हैं या कोई बड़ा बदलाव करते हैं तो उसकी शुरुआत छोटे से कदम से ही होती है। छोटे-छोटे प्रयासों से हम बड़ी-बड़ी परेशानियां खत्म कर सकते हैं। इस कहानी के माध्यम से मैं आप सभी से यहीं कहना चाहता हूँ कि हम जब भी कोई कार्य करते है तो वह सभी के लिये हितकारी हो या हमारी सामर्थ्य सभी का हित न करने की हो तो हम सभी का ध्यान न करते हुए " उस एक मछली का जीवन जिस तरह से बच्चा बदल रहा था" वैसे ही एक के लिए काम करे। एक को ध्यान में रखकर एक के लिये कार्य करे और धीरे-धीरे 1 से 2, 2 से 3......  बढ़ने में समय नहीं लगेगा।
          इसके साथ ही आप सभी से विनय हैं व आशा करता हूँ कि अगर कोई त्रुटि हुई हो आप मुझे comments के माध्यम से जरूर बताये जिससे कि मैं अपने कार्य की त्रुटि को सुधार सकूं और आप अपने बहमूल्य सुझाव भी अवश्य दे ताकि हम सुझाव का उपयोग कर कार्य को बेहतर तरीके से कर सके। इसके साथ ही कुछ साथी whatsapp group पर भी जुड़े हैं तो वहाँ भी message के द्वारा जरूर बताएं।
           उस परमपिता को प्रणाम व आप सभी का आशीर्वाद, प्रेम, दुआएं व सहयोग मिलता रहे इसी आशा के साथ आप सभी को कोटि कोटि नमन।

https://jeevanekavsar.blogspot.com/2020/04/blog-post.html?m=1

Comments

धन्यवाद I
आपके सुझाव सदैव मिलते रहे।🙏🏻
dj said…
अति सुंदर। आपके ये छोटे प्रयास अवश्य ही आपको लक्ष्य तक पहुंचाएंगे ।इसी विश्वास के साथ अग्रिम शुभकामनाएँ🙏
dj said…
अति सुंदर। आपके ये छोटे प्रयास अवश्य ही आपको लक्ष्य तक पहुंचाएंगे ।इसी विश्वास के साथ अग्रिम शुभकामनाएँ🙏
🙏🏻 कोटि कोटि धन्यवाद
आपकी दुआएं व सहयोग प्राप्त होता रहे, इसी आशा के साथ पुनः धन्यवाद।
बहुत सुंदर कार्य शुरू किया है भैयाजी।
बहुत बहुत शुभकामनाये
जयजयसियाराम
कोटि कोटि धन्यवाद
आप सभी के सहयोग व प्रेरणा से परमात्मा की कृपा का प्रभाव हैं।
जय श्री राम
abhinavjyoti said…
I think you should avoid your first four paragraph in this blog because they are not related to your blog and one more thing pls add more examples ...bund bund se ghadha bharta ....
Dear Abhinav
Thank you so much. You took the time to read the blog. Yes you are right to say but have tried to make a role through those four paragraphs. I have just started writing completely new. I will try to improve as soon as possible. Thank you for your valuable feedback.
Sandhya sahu said…
बहुत बढ़िया बात कही सौमित्र जी आप ने कि थोड़े थोड़े ही प्रयास से हम किसी भी बड़े काम को अंजाम दे सकते है
🙏🏻 जी आपका आभार। आप सभी पहले से ही जानते है, मैंने तो सिर्फ इस post के द्वारा उसे दोहराने का प्रयास किया है।