"शब्दों का महत्व"
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आज का शीर्षक "शब्दों का महत्व" पर बात रखने का प्रयास कर रहा हूँ। शब्द हमें किस तरह लाभ पहुंचा सकते हैं या हानि पहुंचा सकते हैं, यह हमारे उपयोग पर निर्भर करता है। इस post में संलग्न चित्र ही शब्द की विस्तृत जानकारी दे रहा है। हम सभी ने अपने जीवन में जब भी सही शब्दों का चयन किया है। तो एक सकारात्मक बात यह है कि भले ही उन शब्दों के प्रयोग से लाभ ना हुआ हो, तो उन शब्दों से किसी भी प्रकार की हानि नहीं हुई है। किंतु इसके साथ आप सभी भलीभांति परिचित हैं कि अगर हमने क्रोध के वशीभूत होकर, या अपने द्वारा पूर्व अपेक्षाकृत सहयोग ना मिलने की स्थिति में या पूर्व से ही निर्धारित परिणाम प्राप्त ना होने पर अगर गलत शब्दों के माध्यम से अपनी बात रखी है, तो नुकसान सुनिश्चित ही हमारा हुआ है।एक वाक्य आप सभी ने सुना ही होगा "एक बेहतरीन इंसान अपनी जुबान से ही पहचाना जाता है वरना अच्छी बातें तो दीवारों पर भी लिखी होती है।"
मगर हम शब्दों का चुनाव करने में महारत हासिल किए हुए हैं। हम कई बार घर के बाहर बड़े मीठे बोल बोलते हैं, यदि कोई अपरिचित व्यक्ति है,तो उसे प्रभावित करने हेतु और भी मीठे शब्दों का प्रयोग करते हैं। अगर हमें किसी व्यक्ति से किसी तरह का आर्थिक लाभ या अन्य प्रकार की सहायता मिलने कि उम्मीद हो तो सरल मीठे शब्दों का प्रयोग करते हैं। परंतु कभी हम नजदीकी मित्रों से थोड़े कटु शब्दों का प्रयोग कर लेंगे। घर में तो हम बाहर जैसा व्यवहार करते हैं, बिल्कुल उसका उल्टा व्यवहार करते हैं। यदि हम बाहर अपना क्रोध व्यक्त नहीं कर पाए तो वहां का क्रोध अपने घर के सदस्यों के साथ बोलकर व्यक्त करते हैं। जिससे बाहर की समस्या का कोई हल नहीं होता, बल्कि परिवार के सदस्यों के साथ अनुचित व्यवहार करके, हम अपने घर का माहौल असंतुलित कर लेते हैं। ऐसा कुछ अगर हम अपने जीवन में कर रहे हैं, तो हमें अपने शब्दों पर नियंत्रण करने की आवश्यकता है।मेरा मानना है व प्रयास करता हूं कि जब भी उक्त परिस्थितियां निर्मित हो जहां पर हम अपने शब्दों को बोलकर अपना नुकसान करें या अपने शब्दों से किसी दूसरे को नुकसान पहुचाएं (चाहे वो परिचित हो या परिवार के सदस्य हो या अपरिचित हो), उससे बेहतर है कि क्षणिक मौन हो जाए, या वह स्थान छोड़ दे। परन्तु कुछ स्थान व व्यक्ति ऐसे भी होते हैं कि चाहकर भी आप ना तो मौन रह सकते है और ना वो स्थान छोड़ सकते है। ऐसी विकट स्थिति में आपकी मुस्कुराहट व शब्दों का जादू ही चर्चा करके हल निकाल सकता है।
ऊपर की चर्चा में मेरा अनुभव हैं, शायद आपमें से भी बहुत से साथियों का कुछ ऐसा ही अनुभव हो। मानवीय स्वभाव है कि हम अपने मन में प्रश्न बनाते हैं व साथ ही मन से उत्तर भी बना लेते हैं। शब्द के महत्व की बात है तो हर बार बोलकर काम नहीं चल सकता तो मौन होकर देखो।यदि मौन से कार्य नहीं चल रहा तो स्थान बदलकर देखें। उसके बाद भी समस्या हल नहीं हो रही, तो आप सभी ने देखा है कि परामर्श केंद्रों पर चर्चा के माध्यम से समस्या का हल निकाला जाता है। अंत में शब्दों के उपयोग से ही हल निकलेगा। शब्द का अपना एक अलग ही स्थान है। एक और महत्वपूर्ण बात है कि शब्दों से निर्मित बात से हमारा परिवार में, मित्रों में, सहकर्मी से या समाज में किसी व्यक्ति से मतभेद हो जाए तो निम्नलिखित बात सोचे-
"किसी भी व्यक्ति की बात बुरी लगे तो दो तरह से सोचो की यदि व्यक्ति महत्वपूर्ण है तो बात भूल जाओ और यदि बात महत्वपूर्ण हो तो व्यक्ति को भूल जाओ।"
समय-समय पर स्व-विवेक से निर्णय हम लेते रहें। एक बात ऊपर लिखी है कि मीठे शब्द बोलने से लाभ हो ना हो किंतु नुकसान नहीं होगा।
आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद, विनय है कि आप सभी अपना स्नेह, समय, सहयोग व विश्वास सदा बनाए रखिए। साथही आप अपना feedback comment के द्वारा या परिचित मित्र whatsapp के द्वारा जरूर दें। अंत में सबसे महत्वपूर्ण बात की कभी खामोश हो ना पड़े तो निम्नलिखित चंद पंक्तियां जरूर पढ़ें-
परिंदों को मिलेगी मंजिल यकीनन, ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं।
वह लोग रहते हैं खामोश अक्सर, जमाने में जिनके हुनर बोलते हैं।।
स्वस्थ रहें, व्यस्त रहें, मस्त रहें।।
इसी आशा और विश्वास के साथ ईश्वर को प्रणाम व आप सभी को नमन🙏🏻
पिछली पोस्ट पर जाने हेतु link-
https://jeevanekavsar.blogspot.com/2020/04/samsyaekavsar.html?m=1

Comments
आपका समय,सहयोग,सुझाव व स्नेह सदा मिलता रहे, इसी आशा व विश्वास के साथ आपको नमन।
ये आपने अपने अनुभव से भी सही बात कहीं।
आपका समय,सहयोग,सुझाव व स्नेह सदा मिलता रहे, इसी आशा व विश्वास के साथ आपको नमन🙏🏻
आपके सुझाव सदैव आमंत्रित🙏🏻