"दैनिक दिनचर्या- 04/05/2020"
आज जैसे ही lockdown खुला जिंदगी उसी रफ्तार से फिर दौड़ी 😊
ईश्वर को प्रणाम, व सभी साथियों को नमस्कार🙏🏻
आज व्यस्त दिनचर्या के कारण किसी विशेष विषय पर लेखन की तैयारी ना होने के कारण मैंने आज की दिनचर्या को पोस्ट के माध्यम से आपके समक्ष रखकर लेखन को सतत जारी रखने का प्रयास किया है । जैसा कि मेरा मानना है कि lockdown के बाद रोज लिख पाना कहीं ना कहीं कठिन होगा और आज भी कुछ इस तरह की घटना मैंने महसूस की हैं। तो मैंने सोचा कि कुछ विषय विशेष को ना लिखकर, आज के पूरे दिन में जो कुछ घटा उसका अनुभव आपसे साझा किया जाए । इसी को आधार बनाकर आज की दिनचर्या के कुछ बिंदु आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं। आज दिनांक 4.5 2020 को lockdown 3.0 में कुछ विशेष शर्तों के साथ छूट प्रदान की गई हैं, तो हर किसी ने जीवन में रुके हुए कार्य को शीघ्रता से पूर्ण करने हेतु प्रयास किया।
जिन्होंने अपने सकारात्मक कार्य किए, उनका कार्य करना उचित है। मगर आप सभी ने देखा होगा कि जैसे ही शराब दुकानों को खोल गया तो शराब को क्रय करने हेतु बड़ी संख्या में लोगों ने उपस्थित होकर, शराब खरीदने की कोशिश की। जबकि पिछले दिनों में 24 अप्रैल से लॉक डाउन में शराब की दुकान पूर्णता बंद थी। तो lockdown में अगर हमने किसी नशे का सेवन नहीं किया, तो हम आज इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं और हमें नशे की गिरफ्त से आजादी मिल सकती है।
मेरी आज की दिनचर्या में जैसा कि कई बार मैंने अनुभव किया है कि मैं घर से किसी कार्य की योजना बनाकर निकलता हूं, और वह अचानक से परिवर्तित हो जाती है। आज कुछ वैसा ही एक बार पुनः घटा। मेरी शाला को कोरोना बीमारी में क्वॉरेंटाइन सेंटर बनाया गया, जिसमें गांव में बाहर से आने वाले दूसरे जिले या दूसरे राज्य से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को 14 दिन तक क्वॉरेंटाइन सेंटर पर ही रहना होगा(शासन के निर्देशानुसार)। इस हेतु जानकारी प्राप्त होने के साथ ही सागर से अचानक ग्राम औरैया के लिए मैं निकला और शाला में सभी साथियों ने मिलकर क्वॉरेंटाइन सेंटर की तैयारी की, जिसमें शाला के कुछ कक्षों को छोड़कर अधिकांश कक्ष खाली कर दिए गए। इस कार्य में lockdown के नियम का पालन करते हुए पर्याप्त दूरी बनाकर सभी ने कार्य किया। इस कार्य में अपनी सामर्थ्य के अनुसार सभी ने पर्याप्त सहयोग किया।
इस कार्य को करते करते शाम के 7:30 बज गए और अंत में शाला का पूरा भवन ग्राम पंचायत के सचिव को सोप दिया। जिसका शाम के समय में ली गई photo सलंग्न है। सभी ने बहुत दिनों बाद परिसर में कार्य किया व सभी एक दूसरे से मिलकर आनंदित हुए। इस कार्य के उपरांत सागर वापस आने में मैं बहुत लेट हो गया तो अपने मामा के घर ग्राम अगरिया में रात्रि विश्राम किया । मैंने और मेरे भाईयों ने रात 1:00 बजे तक चर्चा की व काफी आनंद लिया।
आज के दिन में शाला परिसर को क्वॉरेंटाइन सेंटर बनाने हेतु सभी के सहयोग के लिए हार्दिक धन्यवाद
ईश्वर को प्रणाम व आप सभी साथियों को कोटि-कोटि नमन🙏🏻
पिछली पोस्ट पर जाने हेतु लिंक- https://jeevanekavsar.blogspot.com/2020/05/lockdownchunotikesathavsar1.html?m=1

Comments
ये तो सौभाग्य की बात हैं कि काम करने का अवसर मिला और प्रभु कृपा से हो पा रहा हैं।